मरीज़ का नाम

उस्मान ख़ानउस्मान ख़ान12 Jul 1984

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चाहता हूँ

किसी शाम तुम्हें गले लगाकर ख़ूब रोना

लेकिन मेरे सपनों में भी वो दिन नहीं ढलता

जिसके आख़री सिरे पर तुमसे गले मिलने की शाम रखी है

सुनता हूँ

कि एक नए कवि को भी तुमसे इश्क़ है

मैं उससे इश्क़ करने लगा हूँ

मेरे सारे दुःस्वप्नों के बयान तुम्हारे पास हैं

और तुम्हारे सारे आत्मालाप मैंने टेप किए हैं

मैं साइक्रेटिस्ट की तरफ़ देखता हूँ

वो तुम्हारी तरफ़

और तुम मेरी तरफ़

और हम तीनों भूल जाते हैं—मरीज़ का नाम!

उस्मान ख़ान
About the poet

उस्मान ख़ान

नई पीढ़ी के कवि-आलोचक। मूल नाम : उस्मान ख़ान जन्म : 12/07/1984 | मंदसौर, मध्य प्रदेश उस्मान ख़ान नई पीढ़ी के कवि-आलोचक हैं जो अपनी रचनात्मकता के साथ संयम से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मालवा के लोक–साहित्य पर पी.एच.डी. किया है और फ़ि…

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