घन गरजत बरसत है मिहरा

Shivadin Ram JoshiShivadin Ram Joshi10 Jun 1921 – 27 Jul 2006

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घन गरजत बरसत है मिहरा |
बिजरी चमके डर मोहि लागे, प्यारा लगेरी मिहरा || घन...
दादुर मोर पपिहरा बोले, आम की डाल कोयालियाँ बोले |
पिहू-पिहू सबद सुनो श्रवनन से, मानत ना सखी ये मिहरा || घन...
सोय रही रतियाँ अंधियारी, नींद उडी नैनन ते प्यारी |
मोरे श्याम श्याम ना घर पर, सोयी जगावत ये मिहरा || घन...
कहूँ किसे मन ना सखी लागे, बिरहनि रैनन में नित जागे |
कहे शिवदीन राधिका अेकली, क्यूँ बरसत है ये मिहरा || घन...
आ नंदलाल पार रही हेला, मैं अलबेली तू अलबेला |
आजा तपन बुझाजा मन की, देखूँ बरसे ये मिहरा || घन...

Shivadin Ram Joshi
About the poet

Shivadin Ram Joshi

शिवदीन राम जोशी (जन्म : १० जून १९२१, खंडेला, सीकर जिला) एक भारतीय कवि थे। उनके साहित्य में सवैया, मनहर, मतगयंद, कुंडली छंद और कवित्त का प्रयोग तथा धमाल, भजन और गजलों का समावेश है। पद्यात्मक रचनाओं का विषय ज्ञान, वैराग्य, प्रेम, प्रकृति चित्रण, प्रार्थना और उप…

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