अर्जुन दग्ध कियो वन खाण्डव

Shivadin Ram JoshiShivadin Ram Joshi10 Jun 1921 – 27 Jul 2006

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अर्जुन दग्ध कियो वन खाण्डव,
जाय यो काज तो तुच्छ सरायो ।
केसरी पुत्र कछु न करी अहो !
स्वर्ण की लंक को जाय जरायो ।
त्रिभुवन नाथ मदन को जारि के,
लोक आनन्द को दूर दुरायो ।
सब जन के मन में ताप करे,
रे ! दारिद्र को जारन को नहीं आयो ।

Shivadin Ram Joshi
About the poet

Shivadin Ram Joshi

शिवदीन राम जोशी (जन्म : १० जून १९२१, खंडेला, सीकर जिला) एक भारतीय कवि थे। उनके साहित्य में सवैया, मनहर, मतगयंद, कुंडली छंद और कवित्त का प्रयोग तथा धमाल, भजन और गजलों का समावेश है। पद्यात्मक रचनाओं का विषय ज्ञान, वैराग्य, प्रेम, प्रकृति चित्रण, प्रार्थना और उप…

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