सतसंग बिना ना रंग चढ़े,
बिन रंग चढ़े ना भक्ति मिले रे |
भक्ति मिले बिन राम न रीझत,
राम बिना नहीं फूल खिले रे |
फूल खिले बिन धूल ही है,
मन भाग्य फटा वह कैसे सिले रे |
शिवदीन यकीन करो उर में,
शुभ संत कृपा गिरिराज हिले रे |
सतसंग बिना ना रंग चढ़े,
बिन रंग चढ़े ना भक्ति मिले रे |
भक्ति मिले बिन राम न रीझत,
राम बिना नहीं फूल खिले रे |
फूल खिले बिन धूल ही है,
मन भाग्य फटा वह कैसे सिले रे |
शिवदीन यकीन करो उर में,
शुभ संत कृपा गिरिराज हिले रे |

शिवदीन राम जोशी (जन्म : १० जून १९२१, खंडेला, सीकर जिला) एक भारतीय कवि थे। उनके साहित्य में सवैया, मनहर, मतगयंद, कुंडली छंद और कवित्त का प्रयोग तथा धमाल, भजन और गजलों का समावेश है। पद्यात्मक रचनाओं का विषय ज्ञान, वैराग्य, प्रेम, प्रकृति चित्रण, प्रार्थना और उप…
View profile & all 18 Poems / Storiesकोउ विधि मोहन का बन जाऊँ ।मोहन मेरा मैं मोहन का, प्रेम से गुण नित गाऊँ ।
चला चल मन तू ब्रज की ओर ।जहां गोपियां राधा संग में, नांचे नन्दकिशोर ।।
मोहन खेल रहे है होरी ।गुवाल बाल संग रंग अनेकों, धन्य-धन्य यह होरी ।
अर्जुन दग्ध कियो वन खाण्डव,जाय यो काज तो तुच्छ सरायो ।
बरसत मिहरा आया श्रावन ।अमृत बरसा, बरसत रिमझिम, धरा हो गई पावन ।