चाँद निकला था परे बाम से पहले पहले

शाइस्ता मुफ़्तीशाइस्ता मुफ़्ती21 Sept 1968

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चाँद निकला था परे बाम से पहले पहले

उस गली भूल पड़े शाम से पहले पहले

बोझ इक दिल पे लिए सुब्ह से रंजीदा हूँ

भर लिए अश्क तिरे जाम से पहले पहले

तुझ से वाबस्ता हैं उम्मीद के साए साए

ख़्वाब तो देख लें अंजाम से पहले पहले

शोख़ रंगों से मचलता है बहकता बादल

काम आसान है आलाम से पहले पहले

बू-ए-गुल फैल चली है मिरे अफ़्साने की

नाम आएगा तिरे नाम से पहले पहले

सोच तेरी है मसाफ़त की तवालत मेरी

एक लम्हे को मिलें काम से पहले पहले

शाइस्ता मुफ़्ती
About the poet

शाइस्ता मुफ़्ती

जन्म : 21 Sep 1968 | कराची, सिंध

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