मैं क्यों उसको फ़ोन करूँ!
उसके भी तो इल्म में होगा
कल शब
मौसम की पहली बारिश थी।
मैं क्यों उसको फ़ोन करूँ!
उसके भी तो इल्म में होगा
कल शब
मौसम की पहली बारिश थी।

Parveen Shakir or Parvin Shakir (Urdu: پروین شاکر) (24 November 1952 – 26 December 1994) was an Urdu poet, teacher and a civil servant of the Government of Pakistan. Parveen Shakir started writing at a very young age, penning both prose and poetry, and contr…
View profile & all 35 Poems / Storiesकमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगीमैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी
चारासाजों की अज़ीयत नहीं देखी जातीतेरे बीमार की हालत नहीं देखी जाती
चारागर भूल गया हो जैसेअब तो मरना ही दवा हो जैसे
हमने ही लौटने का इरादा नहीं कियाउसने भी भूल जाने का वादा नहीं किया
अब कौन से मौसम से कोई आस लगाएबरसात में भी याद जब न उनको हम आए