मैं बोसा लूँगा बहाने बताइये न मुझे
जो दिल लिया है तो क़ीमत दिलाइये न मुझे
दिलों में टालते हो दम निकल ही जावेगा
मैं ना-तवाँ हूँ बहुत आज़माइये न मुझे
बहुत दिनों से मसीहाई का हो दम भरते
मिरा हुआ हूँ तुम्हीं पर जिलाइये न मुझे
ख़त आप भेजेंगे मुझ को पतंग पर लिख कर
ये डोरे जाते हुए हैं उड़ाइए न मुझे
खिलाया चाहिए हो गुल रक़ीब के आगे
ये गर्मी और से कीजे जलाइए न मुझे
तुम्हें रक़ीब की ख़ातिर है लो मैं जाता हूँ
उठाइए न हया को बिठाइये न मुझे








