मैं बोसा लूँगा बहाने बताइये न मुझे

पंडित दया शंकर नसीम लखनवीपंडित दया शंकर नसीम लखनवी

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मैं बोसा लूँगा बहाने बताइये न मुझे

जो दिल लिया है तो क़ीमत दिलाइये न मुझे

दिलों में टालते हो दम निकल ही जावेगा

मैं ना-तवाँ हूँ बहुत आज़माइये न मुझे

बहुत दिनों से मसीहाई का हो दम भरते

मिरा हुआ हूँ तुम्हीं पर जिलाइये न मुझे

ख़त आप भेजेंगे मुझ को पतंग पर लिख कर

ये डोरे जाते हुए हैं उड़ाइए न मुझे

खिलाया चाहिए हो गुल रक़ीब के आगे

ये गर्मी और से कीजे जलाइए न मुझे

तुम्हें रक़ीब की ख़ातिर है लो मैं जाता हूँ

उठाइए न हया को बिठाइये न मुझे

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
About the poet

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी

उपनाम : 'नसीम' मूल नाम : पंडित दया शंकर कोल जन्म : लखनऊ, उत्तर प्रदेश निधन : लखनऊ, उत्तर प्रदेश पंडित दया शंकर नसीम 1811 ई. में लखनऊ में पैदा हुए थे। उनका सम्बंध पंडितों के संभ्रांत और शिक्षित परिवार से था इसलिए उनको भी साहित्य से बेहद दिलचस्पी थी। ज़रूरी शिक्…

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