आए हो तो ये हिजाब क्या है

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानीमुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

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आए हो तो ये हिजाब क्या है

मुँह खोल दो नक़ाब क्या है

सीने में ठहरता ही नहीं दिल

या-रब इसे इज़्तिराब क्या है

कल तेग़ निकाल मुझ से बोला

तू देख तो इस की आब क्या है

मालूम नहीं कि अपना दीवाँ

है मर्सिया या किताब क्या है

जो मर गए मारे लुत्फ़ ही के

फिर उन पे मियाँ इताब क्या है

औरों से तो है ये बे-हिजाबी

मुझ से ही तुझे हिजाब क्या है

ऐ 'मुसहफ़ी' उठ ये धूप आई

इतना भी दिवाने ख़्वाब क्या है

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
About the poet

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

उपनाम : 'मुसहफ़ी' मूल नाम : शेख़ ग़ुलाम हमदानी जन्म : अमरोहा, उत्तर प्रदेश निधन : लखनऊ, उत्तर प्रदेश संबंधी : मुज़फ़्फ़र अली असीर (शिष्य), हैदर अली आतिश (शिष्य) LCCN : n85030564 ये हैं ग़ुलाम हमदानी मुसहफ़ी, जिनके काव्य परिचय के लिए ये अशआर काफ़ी हैं; शब-ए-हिज्र…

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