अव्यक्त-अभिव्यक्त

लीना मल्होत्रा रावलीना मल्होत्रा राव3 Oct 1968

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अनेक खिलौने अव्यक्त हैं इस मिट्टी में

कई दीवारें अव्यक्त हैं जो बनाएँगी घर

उन उनके लिए जो अभी पैदा नहीं हुए

घड़े अव्यक्त हैं जो लेंगे आकार

भरेंगे जल उन स्रोतों से

जिनके पर्वत अभी पाताल में

भूकंप की हरी झंडी की प्रतीक्षा में

अलसाए हुए पड़े हैं

करोड़ों साल पहले जीवाश्म से बना कोयला

सो रहा है

अव्यक्त है धोबी की इस्त्री में

बीज में अव्यक्त हैं पेड़

भावी नींद में अव्यक्त हैं सपने

बारिश अव्यक्त

ताले में बंद पड़ी है मेघ में,

मेघ घटा में,

घटा मौसम में

मौसम धरती की झुकी हुई धुरी में अव्यक्त है अभी

अभिव्यक्त है

जो समूचा सच नहीं है वो भी

टिमटिमाता हुआ तारा है जो आकाश में

वह हज़ार साल पहले मर चुका है

उसकी रोशनी की हज़ार लाइट वर्ष की यात्रा है ये

जिसकी चमक आ पहुँची है हम तक अभी-अभी

अभिव्यक्ति में

अव्यक्त है एक पूरी सृष्टि।

लीना मल्होत्रा राव
About the poet

लीना मल्होत्रा राव

सुपरिचित कवयित्री। स्त्रीवादी संवेदना-सरोकारों के लिए उल्लेखनीय। मूल नाम : लीना मल्होत्रा राव जन्म : 03/10/1968 | गुरुग्राम, हरियाणा कविताओं के सोशल मीडिया दौर में पहले-पहल सामने आईं सुपरिचित कवयित्री लीना मल्होत्रा राव का जन्म 3 अक्टूबर 1968 को गुड़गाँव, हरिय…

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