पूछे गए सवाल का जवाब न में होगा
यह जानते हुए भी सवाल पूछे जाते रहेंगे
बंद खिड़कियों के ज़ंग लगे दरवाज़ों को
खोलने की इजाज़त माँगी जाती रहेगी
शहर के टाउनहॉल में
खेले जाते रहेंगे स्त्री-मुक्ति के नाटक
तुम अपनी डायरी में घिसती रहना एक ऐसा पेन
जिसकी स्याही सूख गई है
झटकना हाथों को ग़ुस्से में
कि चल पड़ेगा शायद फिर अटक-अटक कर
यहाँ सभी बोल रहे हैं किसी ओर की बात
तभी तो कहते हैं पढ़-सुनकर दूसरों को—अद्भुत है!








