क़िला

लता खत्रीलता खत्री

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ज़ेहन के भीतर बसता है

अपराजित क़िला

या क़िलेनुमा कमरा

जिसके बंद दरवाज़े पर

लगी है कुंडी

ताला ज़ंग लगा हुआ

जहाँ टूटती आईं

सहानुभूति की चाबियाँ

जिसमें वर्जित है

बाहरी प्रवेश

वहाँ कोई नहीं जाता

त्राटक के साधक

तुम्हें लौटना होगा।

लता खत्री
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लता खत्री

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