जिस दिन हमने गृहप्रवेश किया था
लगता है कि उसी दिन गौरैया ने भी
अपने घोंसले का पहला तिनका रखा होगा
इस घर में अब तक हमारी एक पीढ़ी जवान हो रही
परंतु गौरैया की कई-कई पुश्तें पली और उड़ी हैं
इस तरह इस घर पर जितना हमारा अधिकार
उससे कम नहीं इस नन्हीं चिड़िया का
लेकिन कुछ बातें सिर्फ़ बोलने के लिए होती हैं
और कुछ बातें सिर्फ़ समझने के लिए
इस घर में रहते हुए कितने ही वर्ष बीत गए
इसलिए रँगाई-पुताई करनी बहुत ज़रूरी थी
ऐसे में पुश्तैनी घोंसले को उजड़ना ही था
तिनकों का बिखरना निश्चित था
तो इस तरह सरेआम उजाड़ा गया एक आशियाना
विरोध में कोई आवाज़ क्या उठती
एक मामूली चिड़िया की चीं चीं चीं की भला किसे परवाह होती?
हाँ, इस सारे हो-हुल्लड़ के बीच
गौरैया का रुदन सुना सात साल के सोनू ने
रुआँसा होकर बताया जिसने कि
देखो बेघर हुई बेचारी स्पैरो कैसे रो रही








