पतिविहीन स्त्रियाँ

धीरेंद्र 'धवल'धीरेंद्र 'धवल'18 May 1990

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सपाट सड़क पर चलते हुए

मीलों केवल रेगिस्तान देखा

न पानी, न पेड़, न बस्तियाँ देखीं

देखा सरपट चली आ रही थीं स्त्रियाँ

सिर पर पानी का घड़ा लादे

शामिल थीं जीवन बचाने की मुहिम में

जिनमें कुछ पतिविहीन स्त्रियाँ भी थीं

यही वही जीवनदात्री स्त्रियाँ थीं

जिन्हें इतिहास में

सृष्टि की संचालिका कहा जाना था

उन्हें मात्र एक पति की पत्नी कहा गया

पत्नी की संज्ञा से विहीन स्त्रियाँ

कहीं गईं वेश्या, कुलटा और चरित्रहीन

धीरेंद्र 'धवल'
About the poet

धीरेंद्र 'धवल'

नई पीढ़ी के कवि। मूल नाम : धीरेंद्र 'धवल' जन्म : 18/05/1990 | मऊ, उत्तर प्रदेश

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