दयाबाई, poet
Sootradhar · Author

दयाबाई

दयाबाई

मेवात, हरियाणा

  • 7 Poems & Stories
  • 86.4K Reads

Selected Quotes

दयाबाई का कहना है कि साधु-संत की सेवा स्वयं भगवान की सेवा है।
— दयाबाई
Read full
दयादासि हरि नाम लै, या जग में यह सार।हरि भजते हरि ही भये, पायो भेद अपार॥
— दयाबाई
Read full

Poetry & Stories

  1. साखी - दयाबाई

    कं धरत पग, परत कहुं, उमगि गात सब देह।दया मगन हरि रूप में, दिन-दिन अधिक सनेह॥

    4 min read · 12.3K reads
  2. ज्ञान रूप को भयो प्रकास - दयाबाई

    भयो अविद्या तम को नास॥ज्ञान रूप को भयो प्रकास।

    2 min read · 12.3K reads
  3. साध साध सब कोउ कहै, दुरलभ साधू सेव - दयाबाई

    दयाबाई का कहना है कि साधु-संत की सेवा स्वयं भगवान की सेवा है। संसार रूपी सागर को पार करने के लिए यदि हरिनाम नाव की तरह है तो साधु उसका खेने वाला है; इसलिए सत्संग और साधु-सेवा तो करनी ही चाहिए-साध साध सब कोउ कहै, दुरलभ साधू सेव।

    4 min read · 12.3K reads
  4. दयादासि हरि नाम लै, या जग में यह सार - दयाबाई

    दयादासि हरि नाम लै, या जग में यह सार।हरि भजते हरि ही भये, पायो भेद अपार॥

    2 min read · 12.3K reads
  5. सतगुरु सम कोउ है नहीं, या जग में दातार - दयाबाई

    दयाबाई ने सांसारिक दुर्बलताओं से मुक्ति प्राप्त कराने वाले गुरु की महिमा का भी मनोहर वर्णन किया है-सतगुरु सम कोउ है नहीं, या जग में दातार।

    4 min read · 12.3K reads

More Poetry & Stories You May Like