स्वामीनाथन की याद में

चंपा वैदचंपा वैद13 Sept 1930 – 23 Jul 2017

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पहाड़ अकेलेपन में

ऊँचा उठता रहता है

तुम्हारे हाथों से निकली चिड़िया

चोटी पर बैठ

ऊँच-नीच को देख सोचती है

सर्प तुम्हारे डर की रक्षा करते हैं

पहाड़ों के इर्द-गिर्द घूमते

तुम्हारे काले-सफ़ेद के बीच

लाल रंग एक जीभ

चखती है विष

उन सर्पों की सुंदरता का

जिन्हें तुम पकड़ते हो

तुम्हारी आँखें वशीकरन के मंत्र-सी पीछा करती हैं

तुम्हारी हँसी त्रिशूल-सी डराती है

तुम एक अनोखी प्रतिमा हो

साँप-बिच्छुओं के ज़हर को रंग देती

चंपा वैद
About the poet

चंपा वैद

सुपरिचित कवयित्री। मूल नाम : चंपा वैद जन्म : 13/09/1930 | पंजाब निधन : 23/07/2017

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