About बिप्लव चौधुरी
बिप्लव चौधुरी
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Poetry & Stories
वृक्ष
यह छाया, सुनिविड़ संतान है तुम्हारीऔर फल—तुम्हारा पतन;
भ्रूण-हत्या के बाद भी
ज़िंदा हूँज़िंदा रहूँगा
प्राक्तन
सिरहाने मृत्यु की छाप नहीं आती है जब तकउससे पहले जानता हूँ तुम नहीं रुकोगी स्मृति।
तुम्हें
लगता है पृथ्वी में समस्त दृश्य ही है पुनरावृत्तियों कामनुष्य रहेगा बैठा, घास पर उसका प्रेम
पाप
आगामी वसंत में हो सकता हूँ मैं और भी अधिक नष्ट—रहस्यमय प्रकाश, प्रीतिमय पाप की प्रतीक्षा से
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Kavishala has 8 poems and stories by बिप्लव चौधुरी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by बिप्लव चौधुरी
वृक्ष
यह छाया, सुनिविड़ संतान है तुम्हारीऔर फल—तुम्हारा पतन;
भ्रूण-हत्या के बाद भी
ज़िंदा हूँज़िंदा रहूँगा
प्राक्तन
सिरहाने मृत्यु की छाप नहीं आती है जब तकउससे पहले जानता हूँ तुम नहीं रुकोगी स्मृति।
तुम्हें
लगता है पृथ्वी में समस्त दृश्य ही है पुनरावृत्तियों कामनुष्य रहेगा बैठा, घास पर उसका प्रेम
पाप
आगामी वसंत में हो सकता हूँ मैं और भी अधिक नष्ट—रहस्यमय प्रकाश, प्रीतिमय पाप की प्रतीक्षा से
मुझे
एक दिनएक चिड़िया के बराबर
किताब
देर तक बैठकर पढूँगा तुम्हेंनर-नारी के प्रेम के बीच
वृक्ष लोक
सामान्य लोक से पहुँचना चाहता हूँ कहीं। जाता हूँ नदी के निर्जनतट पर। मैं लहरों की ओर देखता रह गया और संध्याकाश में उग
Selected Quotes by बिप्लव चौधुरी (चुनिंदा उद्धरण)
ज़िंदा हूँज़िंदा रहूँगालगता है पृथ्वी में समस्त दृश्य ही है पुनरावृत्तियों कामनुष्य रहेगा बैठा, घास पर उसका प्रेमसामान्य लोक से पहुँचना चाहता हूँ कहीं। जाता हूँ नदी के निर्जनतट पर। मैं लहरों की ओर देखता रह गया और संध्याकाश में उगसिरहाने मृत्यु की छाप नहीं आती है जब तकउससे पहले जानता हूँ तुम नहीं रुकोगी स्मृति।आगामी वसंत में हो सकता हूँ मैं और भी अधिक नष्ट—रहस्यमय प्रकाश, प्रीतिमय पाप की प्रतीक्षा सेयह छाया, सुनिविड़ संतान है तुम्हारीऔर फल—तुम्हारा पतन;Videos on बिप्लव चौधुरी
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