किताब

बिप्लव चौधुरीबिप्लव चौधुरी

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देर तक बैठकर पढूँगा तुम्हें

नर-नारी के प्रेम के बीच

रात के स्टेशन या दीप्र मैदान में,

मछलियों की तैराकी से लेकर पंछियों की उड़ान तक—

अब तक नहीं जान सका जो

आज जान लूँगा उन सबके माने।

बिप्लव चौधुरी
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बिप्लव चौधुरी

बिप्लव चौधुरी

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