अनुबंध

बेबी शॉबेबी शॉ

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जब मैं तुमको सोचती हूँ

कितनी सरल हो जाती है दुनिया

जब मैं तुमको पाती हूँ

कितने व्यर्थ लगते हैं

ये हीरे-मोती

तुमको सुनती हूँ जब

लगता है खिलखिला उठी हूँ सुर में

रवींद्र संगीत,

गीतबितान...

सफल होना,

न होना

सब कुछ बेकार...

और

आँखों में पानी

सीने में दर्द

उम्र भर यूँ गोपियों-सी

काँपती हुई

ज्यों आसमान...

तुम मिलते नहीं जब

मैं करती हूँ

इंतिज़ार...

बेबी शॉ
About the poet

बेबी शॉ

नई पीढ़ी की सुपरिचित-सम्मानित बांग्ला कवि-गद्यकार-अनुवादक। बारह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी में भी कविताएँ लिखती हैं।

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