About बा. भ. बोरकर
मराठी और कोंकणी के सुप्रसिद्ध कवि-कादंबरीकार। पद्मश्री से सम्मानित। मूल नाम : बाळकृष्ण भगवंत बोरकर जन्म : 30/11/1910 | गोवा निधन : 08/07/1984 | पुणे, महाराष्ट्र
Selected Quotes
Poetry & Stories
साँझ
डाली की तरह झुक जाती है साँझ,जामुनों-जैसे पकते हैं बादल,
वह एक याद
तेज़ ऊँची लहरें तट की रेत पर फेंकती हैं सफ़ेद झाग,न दुःख, न पछतावा, महज़ वो एक याद ही काफ़ी है।
ज्यों-ज्यों समझ आती है
ज्यों-ज्यों समझ आती है,त्यों-त्यों निकटतम व्यक्ति भी होते हैं दूर,
बारह मास एक ही क्षण में
चित्रों को पुष्पित करता हुआ चैत्रतुम्हारी देह की मादकता बनता है,
शिष्टाचार
रहने दो दर्पण मुझको तोअपना पनघट ही है भाता
About बा. भ. बोरकर
मराठी और कोंकणी के सुप्रसिद्ध कवि-कादंबरीकार। पद्मश्री से सम्मानित।
मूल नाम : बाळकृष्ण भगवंत बोरकरजन्म : 30/11/1910 | गोवानिधन : 08/07/1984 | पुणे, महाराष्ट्र
मराठी और कोंकणी के सुप्रसिद्ध कवि-कादंबरीकार। पद्मश्री से सम्मानित। बा. भ. बोरकर was born on 30 November 1910. Associated place: गोवा. बा. भ. बोरकर passed away on 8 July 1984. Kavishala has 5 poems and stories by बा. भ. बोरकर, free to read on this page, along with selected quotes you can share.बा. भ. बोरकर: Quick Answers
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Poems & Stories by बा. भ. बोरकर
साँझ
डाली की तरह झुक जाती है साँझ,जामुनों-जैसे पकते हैं बादल,
वह एक याद
तेज़ ऊँची लहरें तट की रेत पर फेंकती हैं सफ़ेद झाग,न दुःख, न पछतावा, महज़ वो एक याद ही काफ़ी है।
ज्यों-ज्यों समझ आती है
ज्यों-ज्यों समझ आती है,त्यों-त्यों निकटतम व्यक्ति भी होते हैं दूर,
बारह मास एक ही क्षण में
चित्रों को पुष्पित करता हुआ चैत्रतुम्हारी देह की मादकता बनता है,
शिष्टाचार
रहने दो दर्पण मुझको तोअपना पनघट ही है भाता
Selected Quotes by बा. भ. बोरकर (चुनिंदा उद्धरण)
डाली की तरह झुक जाती है साँझ,जामुनों-जैसे पकते हैं बादल,ज्यों-ज्यों समझ आती है,त्यों-त्यों निकटतम व्यक्ति भी होते हैं दूर,रहने दो दर्पण मुझको तोअपना पनघट ही है भाताचित्रों को पुष्पित करता हुआ चैत्रतुम्हारी देह की मादकता बनता है,तेज़ ऊँची लहरें तट की रेत पर फेंकती हैं सफ़ेद झाग,न दुःख, न पछतावा, महज़ वो एक याद ही काफ़ी है।Videos on बा. भ. बोरकर
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