बारह मास एक ही क्षण में

बा. भ. बोरकरबा. भ. बोरकर30 Nov 1910 – 8 Jul 1984

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चित्रों को पुष्पित करता हुआ चैत्र

तुम्हारी देह की मादकता बनता है,

और वैशाख वक्षस्थल में फलित होकर

नई गंध फैलाता है।

जेठ ने तुम्हारे अंगों में

कोमल जुही की मृदुता भर दी,

और आषाढ़ ने

आँखों में भर दी गीली काजल की रातें।

सावन ने तेरे मुखड़े पर

धूप और बरखा की जाली उढ़ा दी,

और भादो ने रोम-रोम में भर दिया

नए अंकुरों का उन्मेष।

तेरे शब्दों में आश्विन के नभ का

चमत्कार समाया है,

और हाव-भावों में

कार्तिक करता है शृंगार।

तेरी गति की भव्यता में

मार्गशीर्ष का बड़प्पन है,

और मोहक लावण्य में

पौष की चाँदनी की शांत स्निग्धता।

तेरे स्पर्श में

माघ के हृदय का आकर्षण,

और तेरी ख़ुशियों में

फागुन बिखेरता है संध्या के रंग।

तेरे कारण एक ही क्षण में

बारह मासों का आलिंगन संभव बनता है,

और संपूर्ण सृष्टि का सौंदर्य

पीता हूँ

अधरों के यौवन में।

बा. भ. बोरकर
About the poet

बा. भ. बोरकर

मराठी और कोंकणी के सुप्रसिद्ध कवि-कादंबरीकार। पद्मश्री से सम्मानित। मूल नाम : बाळकृष्ण भगवंत बोरकर जन्म : 30/11/1910 | गोवा निधन : 08/07/1984 | पुणे, महाराष्ट्र

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