चुप्पी

आशीष यादवआशीष यादव9 Oct 1998

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मैं एक इतिहास का विद्यार्थी

अपनी वर्तमान सभ्यता के

खंडहर में बदल जाने के डर से

विभिन्न आदिम सभ्यताओं के

विनाश के कारणों की पड़ताल पर हूँ

पहले विभिन्न विद्वतजनों की

किताबें पलटता हूँ

सभी का अध्ययन

समान्यत: तीन कारणों पर एकमत है

प्राकृतिक आपदा, महामारी, बाह्य आक्रमण

पड़ताल सिर्फ़ किताबी न रहे

तो मैं विभिन्न आदिम सभ्यताओं के

भ्रमण पर निकलता हूँ

मिस्र के पिरामिड पर

आक्रमणकारियों के

न तोपों, न तलवारों का निशान है

न ही महामारी में मरे

मोहनजोदड़ो की सड़कों पर

मुझे लाशों का अंबार दिखता है

न ही मेसोपोटामिया की उपजाऊ ज़मीन पर

उजाड़ने वाली उफनती नदी दिखाई देती है

सारी यात्रा के दौरान

एक चुप्पी मेरे साथ विचरती है

मैं वर्तमान को टटोलता हूँ

और उसी चुप्पी को महसूस करता हूँ

विभिन्न आदिम सभ्यताएँ

न महामारी, न बाह्य आक्रमण

बल्कि चुप्पी से नष्ट हुई थीं

हम तुम भी वैसे ही नष्ट हो जाएँगे

अगर ऐसे ही चुप्पी का हाथ पकड़े रहे।

आशीष यादव
About the poet

आशीष यादव

नई पीढ़ी के कवि-लेखक। मूल नाम : आशीष यादव जन्म : 09/10/1998 | ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश

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