अगर नदी तुम्हें विमोहित नहीं करती
तो तुम्हारी नाव तुम्हें कहीं नहीं ले जाएगी
वृक्ष तुम्हें कृतज्ञता से नहीं भर देते
तो तुम्हारे अंदर एक कुल्हाड़ी छुपी है
तुम्हारे अंदर बचपन के ख़रगोश की निर्दोष आँखें अब भी चमक रही हैं
तो तुम बचे हुए हो
नहीं तो एक निरर्थक विवशता के सिवा हो क्या तुम?








