अरुण देव, poet
Sootradhar · Author

अरुण देव

अरुण देव

16 September 1972कुशीनगर, उत्तर प्रदेश, भारत

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Selected Quotes

मेघ बरस रहा हैकोई भी जगह न छोड़ी उसने
— अरुण देव
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दाएँ हाथ में बायाँ अदृश्य रहता थादायाँ ही जैसे हाथ हो
— अरुण देव
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Poetry & Stories

  1. क्या तो समय - अरुण देव

    शिक्षा : जवाहरलाल नेहरू विश्व-विद्यालय(नई दिल्ली) से एम.फिल.,पी.एच.डी. ,विश्व-विद्यालय अनुदान आयोग की फेलोशिप के अंतर्गत मोहन राकेश और आचार्य महावीरप्रसाद द्दिवेदी पर शोध कार्य, क्या तो समय (कविता-संग्रह) 2004 भारतीय ज्ञानपीठ,नई दिल्ली, कुछ आलोचनात्मक लेख, संस्कृति,उपनिवेश और हिंदी आलोचना बहुवचन-८, राष्ट्र की अवधारणा, भारत का अतीत और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,बहुवचन-11,उपनिवेश और हिंदी का स्वरूप,बहुवचन -२५ ,Mahatma Gandi international Hindi University,Verdha....... हिंदी नवरत्न.

    3 min read · 12.4K reads
  2. दाँत का टूटना - अरुण देव

    जहाँ से टूटा था दाँतजीभ बार बार वहीं जाती सहलाती

    3 min read · 12.4K reads
  3. बाएँ बाजू का टूटना - अरुण देव

    दाएँ हाथ में बायाँ अदृश्य रहता थादायाँ ही जैसे हाथ हो

    3 min read · 12.4K reads
  4. आओ, आत्महत्या करें - अरुण देव

    १)इतिहास में उन्होंने कभी मुझे मारा था

    9 min read · 12.4K reads
  5. ततैया का घर - अरुण देव

    घरों में कहीं किसी जगह वह अपना घर बनाती हैंछत्ते जहाँ उनके अण्डे पलते हैं

    3 min read · 12.4K reads

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उसने मिट्टी को छुआ भर था - प्रताप सोमवंशीपसोपेश में हूँकि कविता चिह्नों में होती है— प्रताप सोमवंशीदर्द औरों का हम - प्रताप सोमवंशीपसोपेश में हूँकि कविता चिह्नों में होती है— प्रताप सोमवंशीकिसी ग़रीब की बरसों की आरज़ू हो जाऊँकिसी ग़रीब की बरसों की आरज़ू हो जाऊँमैं इस सुरंग से निकलूँ तो आब-जू हो जाऊँ— मुनव्वर रानाख़ुद अपने ही हाथों का लिखा काट रहा हूँख़ुद अपने ही हाथों का लिखा काट रहा हूँले देख ले दुनिया मैं पता काट रहा हूँ— मुनव्वर रानाआगगाड़ी आ रही हैएकआगगाड़ी दौड़ती आ रही है। उसका आरव प्रतिध्वनित— ओ. एम. अनुजनभूमिहीनभूख के शिकार पर निकले ये शिकारीएकदम मुकम्मल आदमी हैं— हुकुम ठाकुर