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Poetry & Stories
क्या तो समय - अरुण देव
शिक्षा : जवाहरलाल नेहरू विश्व-विद्यालय(नई दिल्ली) से एम.फिल.,पी.एच.डी. ,विश्व-विद्यालय अनुदान आयोग की फेलोशिप के अंतर्गत मोहन राकेश और आचार्य महावीरप्रसाद द्दिवेदी पर शोध कार्य, क्या तो समय (कविता-संग्रह) 2004 भारतीय ज्ञानपीठ,नई दिल्ली, कुछ आलोचनात्मक लेख, संस्कृति,उपनिवेश और हिंदी आलोचना बहुवचन-८, राष्ट्र की अवधारणा, भारत का अतीत और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,बहुवचन-11,उपनिवेश और हिंदी का स्वरूप,बहुवचन -२५ ,Mahatma Gandi international Hindi University,Verdha....... हिंदी नवरत्न.
दाँत का टूटना - अरुण देव
जहाँ से टूटा था दाँतजीभ बार बार वहीं जाती सहलाती
बाएँ बाजू का टूटना - अरुण देव
दाएँ हाथ में बायाँ अदृश्य रहता थादायाँ ही जैसे हाथ हो
आओ, आत्महत्या करें - अरुण देव
१)इतिहास में उन्होंने कभी मुझे मारा था
ततैया का घर - अरुण देव
घरों में कहीं किसी जगह वह अपना घर बनाती हैंछत्ते जहाँ उनके अण्डे पलते हैं
अरुण देव: Quick Answers
When was अरुण देव born?
अरुण देव was born on 16 September 1972. Associated place: कुशीनगर, उत्तर प्रदेश, भारत.
Where can I read अरुण देव's poetry?
Kavishala has 90 poems and stories by अरुण देव, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by अरुण देव
क्या तो समय - अरुण देव
शिक्षा : जवाहरलाल नेहरू विश्व-विद्यालय(नई दिल्ली) से एम.फिल.,पी.एच.डी. ,विश्व-विद्यालय अनुदान आयोग की फेलोशिप के अंतर्गत मोहन राकेश और आचार्य महावीरप्रसाद द्दिवेदी पर शोध कार्य, क्या तो समय (कविता-संग्रह) 2004 भारतीय ज्ञानपीठ,नई दिल्ली, कुछ आलोचनात्मक लेख, संस्कृति,उपनिवेश और हिंदी आलोचना बहुवचन-८, राष्ट्र की अवधारणा, भारत का अतीत और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,बहुवचन-11,उपनिवेश और हिंदी का स्वरूप,बहुवचन -२५ ,Mahatma Gandi international Hindi University,Verdha....... हिंदी नवरत्न.
दाँत का टूटना - अरुण देव
जहाँ से टूटा था दाँतजीभ बार बार वहीं जाती सहलाती
बाएँ बाजू का टूटना - अरुण देव
दाएँ हाथ में बायाँ अदृश्य रहता थादायाँ ही जैसे हाथ हो
आओ, आत्महत्या करें - अरुण देव
१)इतिहास में उन्होंने कभी मुझे मारा था
ततैया का घर - अरुण देव
घरों में कहीं किसी जगह वह अपना घर बनाती हैंछत्ते जहाँ उनके अण्डे पलते हैं
दर्दनाशक की मदद - अरुण देव
यार, ये अच्छी बात है कि तुम्हें पता रहता है कि देह में दर्द कहाँ हैघुलकर हर लेते हो
वर्षा-रति - अरुण देव
मेघ बरस रहा हैकोई भी जगह न छोड़ी उसने
इस बियाबान में - अरुण देव
नफ़रत में ताक़त हैकिसी तेज़धार तलवार से भी अधिक
अन्तिम कविता - अरुण देव
गुलेल से फेंकी गईं कठोरताएँक्रूरताओं की बारिश में लौट रहीं हैं
झीनी चदरिया - अरुण देव
चादर को मैली होने से बचाने केकितने जतन थे सहाय बाबू के पास
आपको आज़ादी है - अरुण देव
आपको हक़ है अभिव्यक्ति कामूलभूत है
पुरस्कार का खेल - अरुण देव
आओ पुरस्कार खेलेंइसलिए कि इसी से होकर यह मेरे पास भी आएगा
Selected Quotes by अरुण देव (चुनिंदा उद्धरण)
मेघ बरस रहा हैकोई भी जगह न छोड़ी उसनेदाएँ हाथ में बायाँ अदृश्य रहता थादायाँ ही जैसे हाथ होजहाँ से टूटा था दाँतजीभ बार बार वहीं जाती सहलातीगुलेल से फेंकी गईं कठोरताएँक्रूरताओं की बारिश में लौट रहीं हैंनफ़रत में ताक़त हैकिसी तेज़धार तलवार से भी अधिकयार, ये अच्छी बात है कि तुम्हें पता रहता है कि देह में दर्द कहाँ हैघुलकर हर लेते होVideos on अरुण देव
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