प्रतीक्षा

अनुजीत इक़बालअनुजीत इक़बाल

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इन शब्द-समूहों में

खोज लेना कभी अपना नाम

नियम, मर्यादा, सीमाओं से परे

विभेद कठोर पाषाण शिला पर

लिख रही हूँ महाकाव्य

जिसे तुम्हारी उपस्थिति से

संपूर्ण होना है

निश्चित तौर पर

किसी दूरंदेशी भविष्य में

बिछोह के लिए किसी दूसरे का होना

कहाँ आवश्यक है

मन बिछड़ जाता है ख़ुद से ही

और फिर एकांत में ही तो चमकते हैं

मन के सच्चे रत्न

और अंतस रहता है

ख़ाली कई-कई दिन

तुम बन बैठे हो

किसी दुर्गम व्योमगंगा के हिमखंड

और मैं नहीं जानती

कब अपनी दारुण जड़ता को तोड़

उतरोगे इस धरा पर

लेकिन इतना भी विलंब न कर देना कि

मैं प्यास का अर्थ ही भूल जाऊँ

अनुजीत इक़बाल
About the poet

अनुजीत इक़बाल

सुपरिचित कवयित्री। अँग्रेज़ी में चार पुस्तकें प्रकाशित। मूल नाम : अनुजीत इक़बाल

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