अमिना रौशनी रिशा, poet
Sootradhar · Author

अमिना रौशनी रिशा

अमिना रौशनी रिशा

पंजाब, पाकिस्तान

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Selected Quotes

बाँहों के किसी हार की मुहताज नहीं हैचाहत है ये इक़रार की मुहताज नहीं है
— अमिना रौशनी रिशा
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तुम ने कैसी ये की है वफ़ा ज़िंदगीहर कोई मुझ से है अब ख़फ़ा ज़िंदगी
— अमिना रौशनी रिशा
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Poetry & Stories

  1. तुम ने कैसी ये की है वफ़ा ज़िंदगी

    तुम ने कैसी ये की है वफ़ा ज़िंदगीहर कोई मुझ से है अब ख़फ़ा ज़िंदगी

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  2. ख़्वाबों में छुपी हूँ न किसी प्यार में गुम हूँ

    ख़्वाबों में छुपी हूँ न किसी प्यार में गुम हूँऔरत हूँ मैं अज्दाद की दस्तार में गुम हूँ

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  3. करते हैं सितम रोज़ वो मरने नहीं देते

    करते हैं सितम रोज़ वो मरने नहीं देतेवो मेरे किसी ज़ख़्म को भरने नहीं देते

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  4. बाँहों के किसी हार की मुहताज नहीं है

    बाँहों के किसी हार की मुहताज नहीं हैचाहत है ये इक़रार की मुहताज नहीं है

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  5. मुझे क्या ख़बर है कि क्यूँकर हुआ है

    मुझे क्या ख़बर है कि क्यूँकर हुआ हैज़माना मिरी ज़ात से क्यों ख़फ़ा है

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