हर देह सुंदर होती है

आदित्य शुक्लआदित्य शुक्ल27 Sept 1991

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हर देह सुंदर होती है

हर मुस्कान पवित्र—

भूरी मिट्टी पर सफ़ेद पंक्तिबद्ध बैठे बगुलों के बीच पालथी मारकर बैठी स्त्री ने कहा।

उसने बाद में बताया : मैं नहीं हूँ सुंदर स्त्री

न ही बची है मेरे पास कोई मुस्कान

ऐसा बहुत लोग कहते हैं...

दर्पण में ख़ुद को देखकर हो जाती हूँ शर्मिंदा

परंतु मेरे लिए अन्य सब कुछ सुंदर है

और इस अन्य से ही मैं दीप्तिमान हूँ।

आदित्य शुक्ल
About the poet

आदित्य शुक्ल

आदित्य शुक्ल 1991 देवरिया, उत्तर प्रदेश नई पीढ़ी के कवि, लेखक और अनुवादक। Aditya Shukla 1991 Deoria, Uttar Pradesh A new generation of poets, writers and translators.

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