हर देह सुंदर होती है
हर मुस्कान पवित्र—
भूरी मिट्टी पर सफ़ेद पंक्तिबद्ध बैठे बगुलों के बीच पालथी मारकर बैठी स्त्री ने कहा।
उसने बाद में बताया : मैं नहीं हूँ सुंदर स्त्री
न ही बची है मेरे पास कोई मुस्कान
ऐसा बहुत लोग कहते हैं...
दर्पण में ख़ुद को देखकर हो जाती हूँ शर्मिंदा
परंतु मेरे लिए अन्य सब कुछ सुंदर है
और इस अन्य से ही मैं दीप्तिमान हूँ।








