जब भी किसी पुल से गुज़रता हूँ
याद आते हैं पिता
ज़िंदगी की कितनी ही यात्राएँ
उनके कंधों से होकर गुज़री हैं
पिता के काँधे की लंबाई
दुनिया के किसी भी पुल से लंबी है।
जब भी किसी पुल से गुज़रता हूँ
याद आते हैं पिता
ज़िंदगी की कितनी ही यात्राएँ
उनके कंधों से होकर गुज़री हैं
पिता के काँधे की लंबाई
दुनिया के किसी भी पुल से लंबी है।
