किताबें

आदित्य रहबरआदित्य रहबर

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किसी मुल्क की क़ाबिलियत

वहाँ की किताबों से आँकी जा सकती है

धर्मस्थलों या इमारतों से नहीं

किताबों का अलग एक अपना धर्म होता है

जहाँ विज्ञान साँस लेता है

मानवता मुस्कुराती है।

किताबें हर युग में

युद्धों के ख़िलाफ़ खड़ी रही हैं

परमाणु-परीक्षण से ज़्यादा

इस दुनिया को किताबें पलटने की ज़रूरत है

किताबों से बड़ा युद्ध नहीं इस दुनिया में

बर्बरता के ख़िलाफ़।

आदित्य रहबर
About the poet

आदित्य रहबर

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

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