About यशस्वी पाठक
नई पीढ़ी की कवि-लेखक।
Selected Quotes
Poetry & Stories
सवाना घास के मैदानों से
सवाना घास के मैदानों सेअवध के खेत और खलिहानों तक
जिन शब्दों के कोई अर्थ नहीं थे
जिन शब्दों के कोई अर्थ नहीं थेउन्हें निरर्थक शब्द कहा गया
आराम से पढ़ूँगी तुम्हें
आराम से पढ़ूँगी तुम्हेंकहीं कोई रुआँ बाक़ी न रहेगा
पिता जब निराश होते हैं
पिता जब निराश होते हैंतब सिलने बैठते हैं
चेतन-निश्चेतन को तरंगित कर रही छठी इंद्री
चेतन-निश्चेतन को तरंगित कर रही छठी इंद्रीबिधने की कोई सीमा नहीं
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नई पीढ़ी की कवि-लेखक।
यशस्वी पाठक: Quick Answers
Who is यशस्वी पाठक?
नई पीढ़ी की कवि-लेखक।
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Kavishala has 10 poems and stories by यशस्वी पाठक, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by यशस्वी पाठक
सवाना घास के मैदानों से
सवाना घास के मैदानों सेअवध के खेत और खलिहानों तक
जिन शब्दों के कोई अर्थ नहीं थे
जिन शब्दों के कोई अर्थ नहीं थेउन्हें निरर्थक शब्द कहा गया
आराम से पढ़ूँगी तुम्हें
आराम से पढ़ूँगी तुम्हेंकहीं कोई रुआँ बाक़ी न रहेगा
पिता जब निराश होते हैं
पिता जब निराश होते हैंतब सिलने बैठते हैं
चेतन-निश्चेतन को तरंगित कर रही छठी इंद्री
चेतन-निश्चेतन को तरंगित कर रही छठी इंद्रीबिधने की कोई सीमा नहीं
अंदर झाँकती हूँ तो खुलता है किवाड़
अंदर झाँकती हूँ तो खुलता है किवाड़मशीन वाले कमरे का
आते रहे विचार फटे पुराने पीले पन्नों से
आते रहे विचार फटे पुराने पीले पन्नों सेहल्के-फुल्के, भटकते-बिचरते
माँ मुझे चुप्पी लड़की कहती रही
माँ मुझे चुप्पी लड़की कहती रहीबहनें लड़ाका
अप्रसिद्धि बचाती है
अप्रसिद्धि बचाती हैप्रतिस्पर्धा की प्रताड़ना से
इतनी वाचालता का क्या करूँ कि
इतनी वाचालता का क्या करूँ किआ जाए स्वयं को प्रायोजित करना
Selected Quotes by यशस्वी पाठक (चुनिंदा उद्धरण)
इतनी वाचालता का क्या करूँ किआ जाए स्वयं को प्रायोजित करनामाँ मुझे चुप्पी लड़की कहती रहीबहनें लड़ाकाअंदर झाँकती हूँ तो खुलता है किवाड़मशीन वाले कमरे कापिता जब निराश होते हैंतब सिलने बैठते हैंआराम से पढ़ूँगी तुम्हेंकहीं कोई रुआँ बाक़ी न रहेगाजिन शब्दों के कोई अर्थ नहीं थेउन्हें निरर्थक शब्द कहा गयाVideos on यशस्वी पाठक
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