बरबाद न कर उस को ज़रा हाथ पे धर ला

वाजिद अली शाह अख़्तरवाजिद अली शाह अख़्तर30 Jul 1823 – 21 Sept 1887

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बरबाद न कर उस को ज़रा हाथ पे धर ला

ऐ बाद-ए-सबा ख़ाक-ए-दर-ए-यार इधर ला

सय्याद से क्या फ़िक्र है ऐ ताइर-ए-मज़मूँ

काग़ज़ के तुझे पर भी लगें काम तो कर ला

ले जा दिल-ए-बेताब निशानी मिरी क़ासिद

सीमाब से है मर्तबा-ए-इश्क़ ख़बर ला

ये कान हैं मुश्ताक़-ए-ख़बर क़ासिद-ए-जानाँ

आँखों को भी दीदार है मंज़ूर-ए-नज़र ला

हसरत है कहीं हसरत-ए-दिल उस की निकाले

इस 'अख़्तर'-ए-ग़मगीं के लिए दीदा-ए-तर ला

वाजिद अली शाह अख़्तर
About the poet

वाजिद अली शाह अख़्तर

उपनाम : 'अख़्तर' मूल नाम : अबुल मंसूर मिर्ज़ा मुहम्मद वाजिद अली शाह जन्म : 30 Jul 1823 | लखनऊ, उत्तर प्रदेश निधन : 21 Sep 1887 LCCN : n83055474 अवध के आख़िरी ताजदार वाजिद अली शाह अख़तर एक पेचीदा शख़्सियत के मालिक थे और शख़्सियत की इसी पेचीदगी ने उनको विवादित बना…

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