तेल जरै बाती जरै, दीपक जरै न कोइ।
दीपक जरताँ सब कहै, भारी अजरज होइ॥
भारी अचरज होइ, जरै लकरी अरु घासा।
अग्नि जरत सब कहैं, होइ यह बडा तमासा॥
तेल जरै बाती जरै, दीपक जरै न कोइ।
दीपक जरताँ सब कहै, भारी अजरज होइ॥
भारी अचरज होइ, जरै लकरी अरु घासा।
अग्नि जरत सब कहैं, होइ यह बडा तमासा॥

Sunderdas (1596–1689) was a noted saint, poet, philosopher and social reformer of medieval India. He was a disciple of Dadu Dayal. Sunderdas was born in Dausa in Rajasthan state in India. Sant Sunderdas composed about 48 books. He is revered as the Sankaracha…
View profile & all 8 Poems / Storiesगज अलि मीन पतंग मृग, इक-इक दोष बिनाश।जाके तन पाँचौं बसै, ताकी कैसी आश॥
गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई कै देह संवारी .मेह सहे सिर, सीत सहे तन धूप समै जो पंचागिनि बारी.
बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय,ना तौ मुख मौन गहि चुप होय रहिए.
पति ही सूं प्रेम होय, पति ही सूं नेम होय,पति ही सूं छेम होय , पति ही सूं रात है.
सुनत नगारे चोट बिगसै कमलमुख,अधिक उछाह फूल्यो मात है न तन में.