गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई

SunderdasSunderdas1 Jan 1596 – 1 Jan 1689

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गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई कै देह संवारी .
मेह सहे सिर, सीत सहे तन धूप समै जो पंचागिनि बारी.
भूख सही रहि रूख तरे पर सुंदरदास सबै दुख भारी .
डासं छांड़ीकै कासन ऊपर आसन मारयो,तै आस न मारी.

Sunderdas
About the poet

Sunderdas

Sunderdas (1596–1689) was a noted saint, poet, philosopher and social reformer of medieval India. He was a disciple of Dadu Dayal. Sunderdas was born in Dausa in Rajasthan state in India. Sant Sunderdas composed about 48 books. He is revered as the Sankaracha…

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