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गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई

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गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई कै देह संवारी .
मेह सहे सिर, सीत सहे तन धूप समै जो पंचागिनि बारी.
भूख सही रहि रूख तरे पर सुंदरदास सबै दुख भारी .
डासं छांड़ीकै कासन ऊपर आसन मारयो,तै आस न मारी.

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