हम पस-ए-पर्दा रहें या पेश-ए-मंज़र में रहें
हाँ हमारे हर्फ़ रौशन दीदा-ए-तर में रहें
एक सफ़ में हम-क़दम रहना अगर मुश्किल हुआ
ये तो मुमकिन है कि हम तुम एक लश्कर में रहें
थक गई हूँ सोचती हूँ ख़ुद को समझाया करूँ
ये कि आख़िर कितने सौदे एक ही सर में रहें
डायरी में आज की तारीख़ पर लिखा मिला
मेज़बानी के लिए तन्हाई की घर में रहें








