About अशोक कुमार पांडेय
हिंदी कवि-कथाकार और अनुवादक। ‘कश्मीरनामा’ शीर्षक पुस्तक के लिए चर्चित। मूल नाम : अशोक कुमार पांडेय जन्म : 01/01/1975 | मऊ, उत्तर प्रदेश
Selected Quotes
Poetry & Stories
माँ की डिग्रियाँ
घर के सबसे उपेक्षित कोने मेंबरसों पुराना जंग खाया बक्सा है एक
हलफ़नामा : कविता के दक्खिन टोले से
एकक़त्ल की उस सर्द अँधेरी रात
किसी सलीब पर देखा है मुझको बोलो तो
एकआधी रात बाक़ी है जैसे आधी उम्र बाक़ी है
राजा भी मरेगा एक दिन
किसी अनजान-सी बीमारी सेया फिर महल की सीढ़ियों से गिरकर
धूल, गंध और पतंगें
एकचाँद पर भी कितनी धूल है
About अशोक कुमार पांडेय
हिंदी कवि-कथाकार और अनुवादक। ‘कश्मीरनामा’ शीर्षक पुस्तक के लिए चर्चित।
मूल नाम : अशोक कुमार पांडेयजन्म : 01/01/1975 | मऊ, उत्तर प्रदेश
हिंदी कवि-कथाकार और अनुवादक। ‘कश्मीरनामा’ शीर्षक पुस्तक के लिए चर्चित। अशोक कुमार पांडेय was born on 1 January 1975. Associated place: मऊ, उत्तर प्रदेश. Kavishala has 25 poems and stories by अशोक कुमार पांडेय, free to read on this page, along with selected quotes you can share.अशोक कुमार पांडेय: Quick Answers
Who is अशोक कुमार पांडेय?
When was अशोक कुमार पांडेय born?
Where can I read अशोक कुमार पांडेय's poetry?
Poems & Stories by अशोक कुमार पांडेय
माँ की डिग्रियाँ
घर के सबसे उपेक्षित कोने मेंबरसों पुराना जंग खाया बक्सा है एक
हलफ़नामा : कविता के दक्खिन टोले से
एकक़त्ल की उस सर्द अँधेरी रात
किसी सलीब पर देखा है मुझको बोलो तो
एकआधी रात बाक़ी है जैसे आधी उम्र बाक़ी है
राजा भी मरेगा एक दिन
किसी अनजान-सी बीमारी सेया फिर महल की सीढ़ियों से गिरकर
धूल, गंध और पतंगें
एकचाँद पर भी कितनी धूल है
एक शाम
एकरौशनी शराब में पड़ी बर्फ़-सी पिघल रही है
कश्मीर : जुलाई के कुछ दृश्य
एकपहाड़ों पर बर्फ़ के धब्बे बचे हैं
सपने में होना भी होना है होने जैसा
एक मुसलसल यात्रा के बीच मिली बापरवाह नींद में भी सपने आते हैंसारी वजूहात हैं अवसाद में डूब जाने की
मैं हर जगह था वैसा ही
मैं बंबई में थातलवारों और लाठियों से बचता-बचाता भागता-चीख़ता
लम्हे ख़त्म नहीं होते पानी की बूँदों की तरह मिलकर बड़े हो जाते हैं
धूल भरी हवा उठती है तुम्हारे क़दमों के एकदम क़रीब सेएक समंदर धुँधला-सा निकल गया है छूते तुम्हें
अरण्यरोदन नहीं है यह चीत्कार
एकइस जंगल में एक मोर था
इन दिनों देश
दिशाएँ पिघलते बर्फ़-सी बेशक्ल गोजर की तरह असंख्य पैरों से रेंगती समय की पीठ पर कच्छप से खुरदुरे निशानों में समय को बींधते से कँटीले बाड़ बाँधती उस पार से इस पार तक रिस-रिसकर जा रही हैं, क्वार की अनमनी धूप-सी कसमसा रही हैं। पश्चिम दिशा का सूर्य पूरब तक आते-आते डूब जाता है। उत्तर दिशा में चाँद का हसिया काटता है सारी रात तम की फ़सल और हारकर फिर दक्षिण की नदी में डूब जाता है।पूरब दिशा में जहाँ होता था एक तारा
Selected Quotes by अशोक कुमार पांडेय (चुनिंदा उद्धरण)
एक मुसलसल यात्रा के बीच मिली बापरवाह नींद में भी सपने आते हैंसारी वजूहात हैं अवसाद में डूब जाने कीघर के सबसे उपेक्षित कोने मेंबरसों पुराना जंग खाया बक्सा है एकधूल भरी हवा उठती है तुम्हारे क़दमों के एकदम क़रीब सेएक समंदर धुँधला-सा निकल गया है छूते तुम्हेंउत्तर दिशा में चाँद का हसिया काटता है सारी रात तम की फ़सल और हारकर फिर दक्षिण की नदी में डूब जाता है।किसी अनजान-सी बीमारी सेया फिर महल की सीढ़ियों से गिरकरमैं बंबई में थातलवारों और लाठियों से बचता-बचाता भागता-चीख़ताVideos on अशोक कुमार पांडेय
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