ख़ाली हाथों में मोहब्बत बाँटती रह जाऊँगी

साइमा इसमासाइमा इसमा

1 min read · 12.4K reads

ख़ाली हाथों में मोहब्बत बाँटती रह जाऊँगी

अपने ख़ाली हाथ आख़िर देखती रह जाऊँगी

कूच कर जाएँगे सब दश्त-ए-वफ़ा से क़ाफ़िले

ख़्वाब आँखों में लिए मैं सोई ही रह जाऊँगी

भूल जाएगा कोई मुझ को बुझाने का हुनर

सुब्ह भी आई तो शब भर से जली रह जाऊँगी

पाऊँगी जुर्म-ए-मोहब्बत की अनोखी सी सज़ा

वक़्त के होंटों पे मैं इक अन-कही रह जाऊँगी

तुम ने छोड़ा है तो रस्ते और रौशन हो गए

तुम ये समझे थे कि रस्ते में खड़ी रह जाऊँगी

वुसअत-ए-अफ़्लाक में भी निस्बत-ए-ज़ोहरा कहाँ

टूट कर भी लम्हा भर की रौशनी रह जाऊँगी

आज सोचा है कि ख़ुद रस्ते बनाना सीख लूँ

इस तरह तो उम्र सारी सोचती रह जाऊँगी

साइमा इसमा
About the poet

साइमा इसमा

मूल नाम : साइमा इसमा

View profile & all 27 Poems / Stories

More from साइमा इसमा

  1. मयस्सर ख़ुद निगह-दारी की आसाइश नहीं रहती

    मयस्सर ख़ुद निगह-दारी की आसाइश नहीं रहतीमोहब्बत में तो पेश-ओ-पस की गुंजाइश नहीं रहती

    12.4K reads
  2. उस रस्ते पर जाते देखा कोई नहीं है

    उस रस्ते पर जाते देखा कोई नहीं हैघर है इक और उस में रहता कोई नहीं है

    12.4K reads
  3. कुछ बे-नाम तअल्लुक़ जिन को नाम अच्छा सा देने में

    कुछ बे-नाम तअल्लुक़ जिन को नाम अच्छा सा देने मेंमैं तो सारी बिखर गई हूँ घर को इकट्ठा रखने में

    12.4K reads
  4. सुनते रहते हैं फ़क़त कुछ वो नहीं कह सकते

    सुनते रहते हैं फ़क़त कुछ वो नहीं कह सकतेआइनों से जो कहें उन को नहीं कह सकते

    12.4K reads
  5. हँसी की आँख में फैला नमी का रंग देखा है

    हँसी की आँख में फैला नमी का रंग देखा हैअँधेरों में लिपटता रौशनी का रंग देखा है

    12.4K reads

More Poetry & Stories You May Like