Selected Quotes
Poetry & Stories
देख क्या तेरी जुदाई में है हालत मेरी
देख क्या तेरी जुदाई में है हालत मेरीकोई पहचान नहीं सकता है सूरत मेरी
कभी भूल कर भी न बात की मुझे दिल से ऐसा भुला दिया
कभी भूल कर भी न बात की मुझे दिल से ऐसा भुला दियाकहूँ क्या मैं तेरी शरारतें कि जिगर को तू ने जला दिया
कहाँ फ़ुर्क़त में है दिलदार उठना बैठना चलना
कहाँ फ़ुर्क़त में है दिलदार उठना बैठना चलनातेरे आशिक़ को है दुश्वार उठना बैठना चलना
अभी तक उन के वही सितम हैं जफ़ा की ख़ू भी नहीं गई है
अभी तक उन के वही सितम हैं जफ़ा की ख़ू भी नहीं गई हैवो रंजिशें भी नहीं गई हैं वो गुफ़्तुगू भी नहीं गई है
आशिक़ की जान जाती है इस बाँकपन को छोड़
आशिक़ की जान जाती है इस बाँकपन को छोड़ऐ बुत ख़ुदा के वास्ते अपने चलन को छोड़
शबाब: Quick Answers
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Kavishala has 6 poems and stories and 3 couplets (sher) by शबाब, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by शबाब
देख क्या तेरी जुदाई में है हालत मेरी
देख क्या तेरी जुदाई में है हालत मेरीकोई पहचान नहीं सकता है सूरत मेरी
कभी भूल कर भी न बात की मुझे दिल से ऐसा भुला दिया
कभी भूल कर भी न बात की मुझे दिल से ऐसा भुला दियाकहूँ क्या मैं तेरी शरारतें कि जिगर को तू ने जला दिया
कहाँ फ़ुर्क़त में है दिलदार उठना बैठना चलना
कहाँ फ़ुर्क़त में है दिलदार उठना बैठना चलनातेरे आशिक़ को है दुश्वार उठना बैठना चलना
अभी तक उन के वही सितम हैं जफ़ा की ख़ू भी नहीं गई है
अभी तक उन के वही सितम हैं जफ़ा की ख़ू भी नहीं गई हैवो रंजिशें भी नहीं गई हैं वो गुफ़्तुगू भी नहीं गई है
आशिक़ की जान जाती है इस बाँकपन को छोड़
आशिक़ की जान जाती है इस बाँकपन को छोड़ऐ बुत ख़ुदा के वास्ते अपने चलन को छोड़
शबाब के शेर
मैं तिरे हुस्न का ख़ल्वत में तमाशाई हूँआईना सीख न जाए कहीं हैरत मेरी
Selected Quotes by शबाब (चुनिंदा उद्धरण)
मैं तिरे हुस्न का ख़ल्वत में तमाशाई हूँ आईना सीख न जाए कहीं हैरत मेरीख़त्त-ए-पेशानी में सफ़्फ़ाक अज़ल के दिन से तेरी तलवार से लिक्खी है शहादत मेरीहुई मुद्दत कि मैं ने बुत-परस्ती छोड़ दी ज़ाहिद मगर अब तक गले में देख ले ज़ुन्नार बाक़ी हैआशिक़ की जान जाती है इस बाँकपन को छोड़ऐ बुत ख़ुदा के वास्ते अपने चलन को छोड़देख क्या तेरी जुदाई में है हालत मेरीकोई पहचान नहीं सकता है सूरत मेरीकभी भूल कर भी न बात की मुझे दिल से ऐसा भुला दियाकहूँ क्या मैं तेरी शरारतें कि जिगर को तू ने जला दियाCouplets (Sher) by शबाब
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