शबाब, poet
Sootradhar · Author

शबाब

शबाब

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Selected Quotes

मैं तिरे हुस्न का ख़ल्वत में तमाशाई हूँ आईना सीख न जाए कहीं हैरत मेरी
— शबाब
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ख़त्त-ए-पेशानी में सफ़्फ़ाक अज़ल के दिन से तेरी तलवार से लिक्खी है शहादत मेरी
— शबाब
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Poetry & Stories

  1. देख क्या तेरी जुदाई में है हालत मेरी

    देख क्या तेरी जुदाई में है हालत मेरीकोई पहचान नहीं सकता है सूरत मेरी

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  2. कभी भूल कर भी न बात की मुझे दिल से ऐसा भुला दिया

    कभी भूल कर भी न बात की मुझे दिल से ऐसा भुला दियाकहूँ क्या मैं तेरी शरारतें कि जिगर को तू ने जला दिया

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  3. कहाँ फ़ुर्क़त में है दिलदार उठना बैठना चलना

    कहाँ फ़ुर्क़त में है दिलदार उठना बैठना चलनातेरे आशिक़ को है दुश्वार उठना बैठना चलना

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  4. अभी तक उन के वही सितम हैं जफ़ा की ख़ू भी नहीं गई है

    अभी तक उन के वही सितम हैं जफ़ा की ख़ू भी नहीं गई हैवो रंजिशें भी नहीं गई हैं वो गुफ़्तुगू भी नहीं गई है

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  5. आशिक़ की जान जाती है इस बाँकपन को छोड़

    आशिक़ की जान जाती है इस बाँकपन को छोड़ऐ बुत ख़ुदा के वास्ते अपने चलन को छोड़

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