वृक्षों का प्रार्थना गीत
मत छुओ, हमे मत छुओ बसन्त
अब नहीं हो सकता
छुपम- छुपेया का खेल
तुम छुओ और हम उड़ जाएँ
अन्तरिक्ष में
लुक जाएँ किसी नक्षत्र, किसी ग्रह, उपग्रह
या तारे की आड़ में
हमें डँस लिया है एक विषैली रात ने
मत छुओ, हमे मत छुओ बसन्त
वृक्षों का प्रार्थना गीत
मत छुओ, हमे मत छुओ बसन्त
अब नहीं हो सकता
छुपम- छुपेया का खेल
तुम छुओ और हम उड़ जाएँ
अन्तरिक्ष में
लुक जाएँ किसी नक्षत्र, किसी ग्रह, उपग्रह
या तारे की आड़ में
हमें डँस लिया है एक विषैली रात ने
मत छुओ, हमे मत छुओ बसन्त

Rajesh Joshi (b. 18 July 1946) is a Hindi writer, poet, journalist and a playwright, who was the recipient of 2002 Sahitya Akademi Award in Hindi for his anthology of poems - 'Do Panktiyon Ke Beech' (Between Two Lines), given by Sahitya Akademi, India's Natio…
View profile & all 25 Poems / Storiesचल चप्पलअपन भी चलें बाहर
मारे जाएँगेजो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जाएँगे
वली दकनीबात इक्कीसवीं सदी की पहली दहाई के शुरूआती दिनों की है
पांव की नसपांव की कोई नस अचानक चढ़ जाती है
बच् चे काम पर जा रहे हैंकोहरे से ढँकी सड़क पर बच् चे काम पर जा रहे हैं