हाथ

प्रताप सोमवंशीप्रताप सोमवंशी20 Sept 1968

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देह में सबसे ताकतवर है हाथ
पैर न भी हो तो पूरी देह खीचने के दृश्य
दिखाई पड़ते हैं अलग-अलग चौराहों पर
भाग्य जहां रहे तहां रहे
ये खुद तोड़ सकते हैं अपनी मेहनत के फल
किसी गिरे को उठा लेते है, निकाल लेते हैं गढढे से बाहर
किसी के सिर पर हों तो
जरूरत नहीं होती किसी साये की
साथ हों तो
दो और दो का जोड़ 22 गिना जाता है
पीठ पर हों तो पहाड़ पार करने की ताकत आ जाती है
हाथ के साथ सबकुछ शुभ है, श्रेष्ठ भी
शर्त इतनी है कि
ये रहें सकारत्मकता के संगीत के साथ

प्रताप सोमवंशी
About the poet

प्रताप सोमवंशी

#PratapSomvanshi अपने भीतर है जो इंसान बचाकर रखना अपनी मिट्टी की ये पहचान बचाकर रखना परिचय. जन्म : 2 नवंबर 1968.

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