About Raghuvir Sahay
Raghuvir Sahay (9 December 1929 – 30 December 1990) was a Hindi poet, short-story writer, essayist, literary critic, translator, and journalist. He remained the chief-editor of the political-social Hindi weekly, Dinmaan, 1969–82. He was awarded the 1984 Sahitya Akademi Award in Hindi for his poetry collection, Log Bho…
Selected Quotes
Poetry & Stories
पहले बदलो - रघुवीर सहाय
उसने पहले मेरा हाल पूछाफिर एकाएक विषय बदलकर कहा
लोकतन्त्र का संकट - रघुवीर सहाय
पुरुष जो सोच नहीं पा रहेकिन्तु अपने पदों पर आसीन हैं और चुप हैं
समझौता - रघुवीर सहाय
एक भयानक चुप्पी छाई है समाज परशोर बहुत है पर सच्चाई से कतरा कर गुज़र रहा है
मौक़ा - रघुवीर सहाय
नेता ने कहा कि सब भ्रष्ट हो गया है सो ठीक कहाहिम्मत की
अरे, अब ऐसी कविता लिखो - रघुवीर सहाय
अरे, अब ऐसी कविता लिखोकि जिसमें छन्द घूमकर आय
About Raghuvir Sahay
He was awarded the 1984 Sahitya Akademi Award in Hindi for his poetry collection, Log Bhool Gaye Hain (लोग भूल गये हैं) (They Have Forgotten, 1982).
Bibliography Sanchayita Raghuvir Sahay (Selected Works), comp. Krishna Kumar.
Kuch pate kuch chitthiyan (कुछ पते कुछ चिट्ठियाँ)
Log Bhool Gaye Hain (लोग भूल गये हैं)
Atmahatya Ke Viruddh (आत्महत्या के विरुद्ध)
Hanso Hanso Jaldi Hanso (हँसो हँसो जल्दी हँसो)
Seedhiyon Par Dhoop Hein (सीढ़ियों पर धूप में)
Raghuvir Sahay: Quick Answers
Who is Raghuvir Sahay?
Raghuvir Sahay (9 December 1929 – 30 December 1990) was a Hindi poet, short-story writer, essayist, literary critic, translator, and journalist. He remained the chief-editor of the political-social Hindi weekly, Dinmaan, 1969–82.
When was Raghuvir Sahay born?
Raghuvir Sahay was born on 9 December 1929. Associated place: Lucknow, United Provinces, British India.
When did Raghuvir Sahay die?
Raghuvir Sahay passed away on 30 December 1990.
Where can I read Raghuvir Sahay's poetry?
Kavishala has 9 poems and stories by Raghuvir Sahay, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Raghuvir Sahay
पहले बदलो - रघुवीर सहाय
उसने पहले मेरा हाल पूछाफिर एकाएक विषय बदलकर कहा
लोकतन्त्र का संकट - रघुवीर सहाय
पुरुष जो सोच नहीं पा रहेकिन्तु अपने पदों पर आसीन हैं और चुप हैं
समझौता - रघुवीर सहाय
एक भयानक चुप्पी छाई है समाज परशोर बहुत है पर सच्चाई से कतरा कर गुज़र रहा है
मौक़ा - रघुवीर सहाय
नेता ने कहा कि सब भ्रष्ट हो गया है सो ठीक कहाहिम्मत की
अरे, अब ऐसी कविता लिखो - रघुवीर सहाय
अरे, अब ऐसी कविता लिखोकि जिसमें छन्द घूमकर आय
पराजय के बाद - रघुवीर सहाय
तुमको लोग भूले जा रहे हैं क्योंकि तुम जाने जाते रहे हो अपने अत्याचारों के कारण और आज तुम हाथ खींचे हुए हो कि तुम्हारे अत्याचारों को लोग भूल जाएँ पर लोग तुम्हीं को भूले जा रहे हैं करो कुछ जिससे कि वह शक्ति दुष्टता की लोग फिर देखें और लोग भयंकर मुग्ध हों एक राष्ट्र के पतन का लक्षण है कि वे जो जीवन भर परोपजीवी रहे सत्ता के तन्त्र में आज उससे बाहर होकर यह भ्रम फैला सकते हैं कि वे किसी दिन यह समाज बदल देंगे और अभी सिर्फ़ मौक़ा देखते हुए बैठे हैं
स्वाधीन व्यक्ति - रघुवीर सहाय
इस अन्धेरे में कभी-कभीदीख जाती है किसी की कविता
आनेवाला खतरा - रघुवीर सहाय
इस लज्जित और पराजित युग मेंकहीं से ले आओ वह दिमाग़
Raghuvir Sahay | Quotes
पढ़ने ने मुझमें रोने का बल दिया,किताब रोना संभव बनाती है।
Selected Quotes by Raghuvir Sahay (चुनिंदा उद्धरण)
इस अन्धेरे में कभी-कभीदीख जाती है किसी की कविताएक भयानक चुप्पी छाई है समाज परशोर बहुत है पर सच्चाई से कतरा कर गुज़र रहा हैनेता ने कहा कि सब भ्रष्ट हो गया है सो ठीक कहाहिम्मत कीपढ़ने ने मुझमें रोने का बल दिया,किताब रोना संभव बनाती है।अरे, अब ऐसी कविता लिखोकि जिसमें छन्द घूमकर आयपुरुष जो सोच नहीं पा रहेकिन्तु अपने पदों पर आसीन हैं और चुप हैंVideos on Raghuvir Sahay
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