अरे, अब ऐसी कविता लिखो - रघुवीर सहाय

Raghuvir SahayRaghuvir Sahay9 Dec 1929 – 30 Dec 1990

1 min read · 13.2K reads

अरे, अब ऐसी कविता लिखो
कि जिसमें छन्द घूमकर आय
घुमड़ता जाय देह में दर्द
कहीं पर एक बार ठहराय

कि जिसमें एक प्रतिज्ञा करूँ
वही दो बार शब्द बन जाय
बताऊँ बार-बार वह अर्थ
न भाषा अपने को दोहराय

अरे, अब ऐसी कविता लिखो
कि कोई मूड़ नहीं मटकाय
न कोई पुलक-पुलक रह जाय
न कोई बेमतलब अकुलाय

छन्द से जोड़ो अपना आप
कि कवि की व्यथा हृदय सह जाय
थाम कर हंसना-रोना आज
उदासी होनी की कह जाय

Raghuvir Sahay
About the poet

Raghuvir Sahay

Raghuvir Sahay (9 December 1929 – 30 December 1990) was a Hindi poet, short-story writer, essayist, literary critic, translator, and journalist. He remained the chief-editor of the political-social Hindi weekly, Dinmaan, 1969–82. He was awarded the 1984 Sahit…

View profile & all 9 Poems / Stories

More from Raghuvir Sahay

  1. पहले बदलो - रघुवीर सहाय

    उसने पहले मेरा हाल पूछाफिर एकाएक विषय बदलकर कहा

    12.7K reads
  2. लोकतन्त्र का संकट - रघुवीर सहाय

    पुरुष जो सोच नहीं पा रहेकिन्तु अपने पदों पर आसीन हैं और चुप हैं

    12.7K reads
  3. समझौता - रघुवीर सहाय

    एक भयानक चुप्पी छाई है समाज परशोर बहुत है पर सच्चाई से कतरा कर गुज़र रहा है

    13.6K reads
  4. मौक़ा - रघुवीर सहाय

    नेता ने कहा कि सब भ्रष्ट हो गया है सो ठीक कहाहिम्मत की

    13.4K reads
  5. पराजय के बाद - रघुवीर सहाय

    तुमको लोग भूले जा रहे हैं क्योंकि तुम जाने जाते रहे हो अपने अत्याचारों के कारण और आज तुम हाथ खींचे हुए हो कि तुम्हारे अत्याचारों को लोग भूल जाएँ पर लोग तुम्हीं को भूले जा रहे हैं करो कुछ जिससे कि वह शक्ति दुष्टता की लोग फिर देखें और लोग भयंकर मुग्ध हों एक राष्ट्र के पतन का लक्षण है कि वे जो जीवन भर परोपजीवी रहे सत्ता के तन्त्र में आज उससे बाहर होकर यह भ्रम फैला सकते हैं कि वे किसी दिन यह समाज बदल देंगे और अभी सिर्फ़ मौक़ा देखते हुए बैठे हैं

    12.7K reads

More Poetry & Stories You May Like