पढ़ने ने मुझमें रोने का बल दिया,
किताब रोना संभव बनाती है।
पढ़ने ने मुझमें रोने का बल दिया,
किताब रोना संभव बनाती है।

Raghuvir Sahay (9 December 1929 – 30 December 1990) was a Hindi poet, short-story writer, essayist, literary critic, translator, and journalist. He remained the chief-editor of the political-social Hindi weekly, Dinmaan, 1969–82. He was awarded the 1984 Sahit…
View profile & all 9 Poems / Storiesउसने पहले मेरा हाल पूछाफिर एकाएक विषय बदलकर कहा
पुरुष जो सोच नहीं पा रहेकिन्तु अपने पदों पर आसीन हैं और चुप हैं
एक भयानक चुप्पी छाई है समाज परशोर बहुत है पर सच्चाई से कतरा कर गुज़र रहा है
नेता ने कहा कि सब भ्रष्ट हो गया है सो ठीक कहाहिम्मत की
अरे, अब ऐसी कविता लिखोकि जिसमें छन्द घूमकर आय