समझौता - रघुवीर सहाय

Raghuvir SahayRaghuvir Sahay9 Dec 1929 – 30 Dec 1990

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एक भयानक चुप्पी छाई है समाज पर
शोर बहुत है पर सच्चाई से कतरा कर गुज़र रहा है

एक भयानक एका बाँधे है समाज को
कुछ न बदलने के समझौते का है एका

एक भयानक बेफ़िक्री है
पाठक अत्याचारों के क़िस्से पढ़ते हैं अख़बारों में
मगर आक्रमण के शिकार को पत्र नहीं लिखते हैं
सम्पादक के द्वारा

सभी संगठित दल विपक्ष के
अविश्वास प्रस्ताव के लिए जुट लेते हैं
एक भयानक समझौता है राजनीति में
हर नेता को एक नया चेहरा देना है ।

Raghuvir Sahay
About the poet

Raghuvir Sahay

Raghuvir Sahay (9 December 1929 – 30 December 1990) was a Hindi poet, short-story writer, essayist, literary critic, translator, and journalist. He remained the chief-editor of the political-social Hindi weekly, Dinmaan, 1969–82. He was awarded the 1984 Sahit…

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