About Kabil Ajmeri
काबिल अजमेरी वासा एक पाकिस्तानी उर्दू कवि थे। Kaabil Ajmeri Wasa was a Pakistani Urdu Poet.
Selected Quotes
Poetry & Stories
तुम्हें जो मेरे गम-ए-दिल से आगाही हो जाए - क़ाबिल अजमेरी
तुम्हें जो मेरे गम-ए-दिल से आगाही हो जाएजिगर में फूल खिलें आँख शबनमी हो जा
दिल-ए-दीवाना अर्ज़-ए-हाल पर माइल तो क्या होगा - क़ाबिल अजमेरी
दिल-ए-दीवाना अर्ज़-ए-हाल पर माइल तो क्या होगामगर वो पूछे बैठे खुद ही हाल-ए-दिल क्या होगा
हैरतों के सिलसिले सोज़-ए-निहाँ तक आ गए - क़ाबिल अजमेरी
हैरतों के सिलसिले सोज़-ए-निहाँ तक आ गएहम नज़र तक चाहते थे तुम तो जाँ तक आ गए
होटों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी है - क़ाबिल अजमेरी
होटों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी हैवहशत बड़े दिलचस्प दो-राहे पे खड़ी है
सुराही का भरम खुलता न मेरी तिश्नगी होती - क़ाबिल अजमेरी
सुराही का भरम खुलता न मेरी तिश्नगी होतीजरा तुम ने निगाह-ए-नाज़ को तकलीफ दी होती
About Kabil Ajmeri
काबिल अजमेरी वासा एक पाकिस्तानी उर्दू कवि थे।
Kaabil Ajmeri Wasa was a Pakistani Urdu Poet.
Kabil Ajmeri: Quick Answers
Who is Kabil Ajmeri?
काबिल अजमेरी वासा एक पाकिस्तानी उर्दू कवि थे। Kaabil Ajmeri Wasa was a Pakistani Urdu Poet.
When was Kabil Ajmeri born?
Kabil Ajmeri was born on 27 August 1931. Associated place: Rajasthan.
When did Kabil Ajmeri die?
Kabil Ajmeri passed away on 3 October 1962.
Where can I read Kabil Ajmeri's poetry?
Kavishala has 7 poems and stories by Kabil Ajmeri, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Kabil Ajmeri
तुम्हें जो मेरे गम-ए-दिल से आगाही हो जाए - क़ाबिल अजमेरी
तुम्हें जो मेरे गम-ए-दिल से आगाही हो जाएजिगर में फूल खिलें आँख शबनमी हो जा
दिल-ए-दीवाना अर्ज़-ए-हाल पर माइल तो क्या होगा - क़ाबिल अजमेरी
दिल-ए-दीवाना अर्ज़-ए-हाल पर माइल तो क्या होगामगर वो पूछे बैठे खुद ही हाल-ए-दिल क्या होगा
हैरतों के सिलसिले सोज़-ए-निहाँ तक आ गए - क़ाबिल अजमेरी
हैरतों के सिलसिले सोज़-ए-निहाँ तक आ गएहम नज़र तक चाहते थे तुम तो जाँ तक आ गए
होटों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी है - क़ाबिल अजमेरी
होटों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी हैवहशत बड़े दिलचस्प दो-राहे पे खड़ी है
सुराही का भरम खुलता न मेरी तिश्नगी होती - क़ाबिल अजमेरी
सुराही का भरम खुलता न मेरी तिश्नगी होतीजरा तुम ने निगाह-ए-नाज़ को तकलीफ दी होती
तलब की आग किसी शोला-रू से रौशन है - क़ाबिल अजमेरी
तलब की आग किसी शोला-रू से रौशन हैखयाल हो के नज़र आरजू से रौशन है
तज़ाद-ए-जज्बात में ये नाजुक मकाक आया तो क्या करोगे - क़ाबिल अजमेरी
तज़ाद-ए-जज्बात में ये नाजुक मकाक आया तो क्या करोगेमैं रो रहा हूँ तो हँस रहे हो, मैं मुसकुराया तो क्या करोगे
Selected Quotes by Kabil Ajmeri (चुनिंदा उद्धरण)
होटों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी हैवहशत बड़े दिलचस्प दो-राहे पे खड़ी हैदिल-ए-दीवाना अर्ज़-ए-हाल पर माइल तो क्या होगामगर वो पूछे बैठे खुद ही हाल-ए-दिल क्या होगातुम्हें जो मेरे गम-ए-दिल से आगाही हो जाएजिगर में फूल खिलें आँख शबनमी हो जाहैरतों के सिलसिले सोज़-ए-निहाँ तक आ गएहम नज़र तक चाहते थे तुम तो जाँ तक आ गएसुराही का भरम खुलता न मेरी तिश्नगी होतीजरा तुम ने निगाह-ए-नाज़ को तकलीफ दी होतीतलब की आग किसी शोला-रू से रौशन हैखयाल हो के नज़र आरजू से रौशन हैVideos on Kabil Ajmeri
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