मोहब्बतों का सिला नहीं है

नजमा शाहीन खोसानजमा शाहीन खोसा

1 min read · 12.4K reads

मोहब्बतों का सिला नहीं है

लबों पे हर्फ़-ए-दुआ नहीं है

नहीं वो तस्वीर पास मेरे

सो हाथ मेरा जला नहीं है

मैं अपनी लौ में ही जल रही हूँ

जो बुझ गया वो दिया नहीं है

बस इक पियाली है मेज़ पर और

वो मुंतज़िर अब मिरा नहीं है

लिखा जनम-दिन पे उस को मैं ने

वो ख़त भी उस को मिला नहीं है

मैं किस लिए पार जाऊँ 'शाहीन'

वहाँ मिरा ना-ख़ुदा नहीं है

नजमा शाहीन खोसा
About the poet

नजमा शाहीन खोसा

LCCN : n2013205355

View profile & all 49 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like

मुनव्वर राना के शेरअब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करोतुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो— मुनव्वर रानातुम्हारे जिस्म की ख़ुश्बू गुलों से आती हैतुम्हारे जिस्म की ख़ुश्बू गुलों से आती हैख़बर तुम्हारी भी अब दूसरों से आती है— मुनव्वर रानाक्या ऐसी स्त्री को जानते हैंहम प्रेम नहीं करतेयानी हमारी भावनाएँ आत्मघाती नहीं हैं— हरे प्रकाश उपाध्यायCouplets by Pratap Somvanshiअपने भीतर है जो इंसान बचाकर रखनाअपनी मिट्टी की ये पहचान बचाकर रखना— प्रताप सोमवंशीमेरे गाँव के कुत्तेएकदुआर पर बैठे नंगे बच्चे से— ऐश्वर्य राजआओ मिलकर बद्दुआ करेंदुनिया का कोई क़ानून बद्दुआओं के लिए किसी को रोक नहीं सकता।इसलिए आओ सब मिल कर बद्दुआ करें कि— फ़रीद ख़ाँ