Selected Quotes
Poetry & Stories
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने हैजाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम कियादेखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
हस्ती अपनी हबाब की सी है
हस्ती अपनी हबाब की सी हैये नुमाइश सराब की सी है
देख तो दिल कि जाँ से उठता है
देख तो दिल कि जाँ से उठता हैये धुआँ सा कहाँ से उठता है
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़जान का रोग है बला है इश्क़
मीर तक़ी मीर: Quick Answers
When did मीर तक़ी मीर die?
मीर तक़ी मीर passed away on 20 September 1810.
Where can I read मीर तक़ी मीर's poetry?
Kavishala has 51 poems and stories by मीर तक़ी मीर, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by मीर तक़ी मीर
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने हैजाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम कियादेखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
हस्ती अपनी हबाब की सी है
हस्ती अपनी हबाब की सी हैये नुमाइश सराब की सी है
देख तो दिल कि जाँ से उठता है
देख तो दिल कि जाँ से उठता हैये धुआँ सा कहाँ से उठता है
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़जान का रोग है बला है इश्क़
फ़क़ीराना आए सदा कर चले
फ़क़ीराना आए सदा कर चलेकि म्याँ ख़ुश रहो हम दुआ कर चले
यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ
यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँअब दो तो जाम ख़ाली ही दो मैं नशे में हूँ
अश्क आँखों में कब नहीं आता
अश्क आँखों में कब नहीं आतालोहू आता है जब नहीं आता
राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्याआगे आगे देखिए होता है क्या
ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुतदिल लगा कर हम तो पछताए बहुत
क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़
क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़हक़-शनासों के हाँ ख़ुदा है इश्क़
जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताज-वरी का
जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताज-वरी काकल उस पे यहीं शोर है फिर नौहागरी का
Selected Quotes by मीर तक़ी मीर (चुनिंदा उद्धरण)
क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़हक़-शनासों के हाँ ख़ुदा है इश्क़जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताज-वरी काकल उस पे यहीं शोर है फिर नौहागरी काक्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़जान का रोग है बला है इश्क़उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम कियादेखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम कियाफ़क़ीराना आए सदा कर चलेकि म्याँ ख़ुश रहो हम दुआ कर चलेज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुतदिल लगा कर हम तो पछताए बहुतVideos on मीर तक़ी मीर
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