स्थिर, अधखुली खिड़की
पीपल के पत्ते पीले
धूप में चमकता काँच
पंख घूमता
चुप चश्मे एकटक सोए, टेबल पर।
हाथ में सिगरेट स्थिर, सुलगती।
बिलकुल ख़ाली बहुत गहरा अतल शब्द।
काग़ज़ को छूकर खड़ी रही कलम।
अचानक कहीं से सुनाई दी हिनहिनाहट
बिलकुल ख़ाली अतल से गूँजा शब्द।
अधखुली खिड़की, मेरा मनोरथ कहाँ है?
पीपल के पत्ते पीले, मनोरथ कहाँ है?
धूप में चमकता काँच, मेरा मनोरथ कहाँ है?
पंखा घूमता
चुप चश्मे एकटक सोए, टेबल पर।
हाथ में सिगरेट स्थिर, सुलगती।
काग़ज़ को छूकर खड़ी रही कलम, मेरा मनोरथ कहाँ है?
फिर से कहीं हिनहिनाया घोड़ा।








