जुगाली करता हूँ

लाभशंकर ठाकरलाभशंकर ठाकर

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यह सामने खड़ा पदार्थ

मेरी शब्द-घास को चबा जाएगा;

और मैं जो महसूस करूँगा

मेरे रुधिर में

वह शब्दमय होगा, काव्यमय होगा।

यह सामने खड़ा पदार्थ

अब मुझसे बिलकुल सटकर खड़ा है।

—और अब वह मुझमें समा गया है।

मैं सूखी शब्द-घास को खच्-खच् उखाड़ता हूँ।

और डकार लेता हूँ

अब मैं चार पैर पसारकर

मन की छाया में

कैफ़ में सोया हूँ

और जुगाली करता हूँ।

लाभशंकर ठाकर
About the poet

लाभशंकर ठाकर

सुपरिचित गुजराती कवि-नाटककार और कथाकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। उपनाम : 'लघरो, वैद्य पुनर्वसु' मूल नाम : लाभशंकर जादवजी ठाकर जन्म : 14/01/1935 | सुरेंद्रनगर, गुजरात निधन : 06/01/2016 | अहमदाबाद, गुजरात

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