हमन हैं इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या

KabeerKabeer

1 min read · 18.1K reads

हमन हैं इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या

रहें आज़ाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या

जो बिछड़े हैं पियारे से भटकते दर-ब-दर फिरते

हमारा यार है हम में हमन को इंतिज़ारी क्या

ख़लक़ सब नाम अपने को बहुत कर सर पटकता है

हमन गर नाम साँचा है हमन दुनिया से यारी क्या

न पल बिछ्ड़ें पिया हम से न हम बिछड़े पियारे से

उन्हीं से नेह लागी है हमन को बे-क़रारी क्या

'कबीरा' इश्क़ का माता दुई को दूर कर दिल से

जो चलना राह नाज़ुक है हमन सर बोझ भारी क्या



Kabeer
About the poet

Kabeer

Kabeer

View profile & all 1 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like