ईद मुबारक! उम्मीद मुबारक!

हिमांशु बाजपेयीहिमांशु बाजपेयी

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बाद मुद्दत के ये उम्मीद का चाँद आया है

कितने अरमान लिए ईद का चाँद आया है

सबके दिल से ये घटा ग़म की छंटेगी अब तो

हर तरफ़ बिखरी परेशानी हटेगी अब तो

अब शिफ़ा होगी तड़पते हुए बीमारों को

चैन मिल जाएगा रहमत के तलबगारों को

जगमगा उट्ठेगी यारों की वो महफ़िल फिर से

राग छेड़ेगा हर एक सहमा हुआ दिल फिर से

कितनी उम्मीदें जगाता है ये उम्मीद का दिन

हाँ मुबारक हो, मुबारक हो बहुत ईद का दिन।

हिमांशु बाजपेयी
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हिमांशु बाजपेयी

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