तुमने दिया एक विचार
और उसे फूलों से लाद दिया
तुमने अगरबत्ती दिखाई उसे
उसकी रक्षा के लिए कवच बनाए
उसके संकेत के लिए
लंबी पताका फहराई शीर्ष पर
उसकी पावनता की अक्षुण्णता के लिए
तुमने
ईंट-गोरे से लेकर संगमरमर तक के आलय बनाए
उसकी आराधना में फूल चढ़े थे सबसे पहले
फिर जानवर चढ़े
और फिर आदमी ही आदमी
एक से अनेक तो हुए
मगर मूर्त न हो सके विचार
मूर्ति हो गए








